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Bihar Police News: दंगा और हिंसक प्रदर्शन से निपटने के लिए हर जिले-अनुमंडल में DARF, 20 मिनट में घटनास्थल पहुंचेगी टीम

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | Bihar Police News: दंगा, हिंसक प्रदर्शन और सांप्रदायिक तनाव से निपटने के लिए बिहार के जिलों और अनुमंडलों में DARF का गठन होगा।

पटना, 19 अगस्त। बिहार में दंगा, हिंसक प्रदर्शन, सांप्रदायिक तनाव और भीड़ से जुड़ी कानून-व्यवस्था की चुनौती से निपटने के लिए पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। पुलिस मुख्यालय ने राज्य के जिलों और अनुमंडल स्तर पर District Anti Riot Force यानी DARF के गठन की योजना तैयार की है। इस विशेष दस्ते को ऐसी परिस्थितियों में तत्काल कार्रवाई के लिए तैयार रखा जाएगा।

नई व्यवस्था की सबसे अहम कड़ी इसका 20 मिनट का रिस्पॉन्स टाइम है। किसी जिले में हिंसक स्थिति या दंगा जैसी घटना की सूचना मिलने पर जिला नियंत्रण कक्ष से सूचना प्रसारित की जाएगी और संबंधित दंगा-निरोधी टीम को निर्धारित घटनास्थल के लिए 20 मिनट के भीतर रवाना करने का लक्ष्य रखा गया है।

इस बल का इस्तेमाल केवल दंगा नियंत्रण तक सीमित नहीं रहेगा। हिंसक प्रदर्शन, सांप्रदायिक तनाव, सड़क जाम, सरकारी संपत्ति पर हमला, भीड़ नियंत्रण और अचानक उत्पन्न होने वाली कानून-व्यवस्था की गंभीर परिस्थितियों में भी इसे लगाया जा सकेगा।

तीन प्लाटून की होगी एक कंपनी

पुलिस मुख्यालय की प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार दंगा-निरोधी दस्ते की एक कंपनी में तीन प्लाटून होंगे। प्रत्येक प्लाटून में 47 प्रशिक्षित जवानों को शामिल किया जाएगा। इनमें आंसू गैस दस्ता, लाठी दस्ता, सशस्त्र बल, चालक और वायरलेस ऑपरेटर जैसे अलग-अलग जिम्मेदारियों वाले कर्मी रहेंगे।

महिला पुलिसकर्मियों को भी इस व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाएगा। आवश्यकता के अनुसार चिकित्सा और एंबुलेंस सहायता उपलब्ध कराने वाले कर्मियों को भी जोड़ा जाएगा। इसके अलावा वीडियोग्राफी और घटनाक्रम के दस्तावेजीकरण के लिए नामित कर्मी, संचार व्यवस्था संभालने वाले जवान और रिजर्व बल भी व्यवस्था का हिस्सा होंगे।

प्रत्येक प्लाटून के साथ दो वाहन उपलब्ध कराने की योजना है। इनमें एक बस और एक ट्रक शामिल होगा। इससे बल के जवानों के साथ जरूरी सामान और दंगा नियंत्रण से संबंधित उपकरणों को भी एक साथ घटनास्थल तक पहुंचाया जा सकेगा।

जिलों को A, B और C श्रेणी में बांटा गया

दंगा-निरोधी बल की जरूरत और संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए जिलों को तीन श्रेणियों में बांटकर कुल 49 कंपनियों के गठन की व्यवस्था की गई है। इसके लिए कुल 294 वाहनों की व्यवस्था की जाएगी।

श्रेणी A में पटना को तीन कंपनियां दी जाएंगी। गया, रोहतास, मुजफ्फरपुर, सारण, मोतिहारी, बेतिया, दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, भागलपुर और बेगूसराय को दो-दो कंपनियां उपलब्ध कराने की योजना है।

श्रेणी B में नालंदा, औरंगाबाद, नवादा, जहानाबाद, भोजपुर, बक्सर, कैमूर, वैशाली, सीतामढ़ी, सिवान, गोपालगंज, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज, बांका, मुंगेर, जमुई और खगड़िया शामिल हैं। इन जिलों को एक-एक कंपनी और छह-छह वाहन उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी।

श्रेणी C में अरवल, शिवहर, बगहा, लखीसराय, शेखपुरा और नवगछिया को एक-एक प्लाटून तथा दो-दो वाहन दिए जाएंगे।

20 मिनट में घटनास्थल के लिए निकलेगी टीम

DARF की तैनाती का मुख्य उद्देश्य पुलिस की प्रतिक्रिया में लगने वाले समय को कम करना है। अभी किसी बड़े कानून-व्यवस्था संकट में अतिरिक्त बल जुटाने और उसे घटनास्थल तक पहुंचाने में समय लग सकता है। नई व्यवस्था में विशेष रूप से तैयार टीम को पहले से उपलब्ध रखा जाएगा।

घटना की सूचना मिलने के बाद जिला नियंत्रण कक्ष संबंधित दस्ते को अलर्ट करेगा। टीम तत्काल अपने निर्धारित संसाधनों के साथ घटनास्थल के लिए रवाना होगी। वहां पहुंचने के बाद DARF स्थानीय वरीय पुलिस पदाधिकारी के निर्देशन और समन्वय में काम करेगी।

टीम मौके की स्थिति का आकलन करने के बाद उपलब्ध कानून और पुलिस नियमों के तहत कार्रवाई करेगी। इसका उद्देश्य भीड़ को नियंत्रित करने के साथ-साथ कानून-व्यवस्था को जल्द सामान्य स्थिति में लाना होगा।

एक महीने का विशेष प्रशिक्षण

DARF के गठन के साथ जवानों के प्रशिक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। प्रत्येक जिले के पुलिस केंद्र में दंगा-निरोधी दस्ते के लिए एक महीने का विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा।

इसके लिए पुलिस अधिकारियों में से प्रशिक्षकों का चयन किया जाएगा। चयनित प्रशिक्षकों को Rapid Action Force Academy for Public Order (RAPO), मेरठ में प्रशिक्षण दिए जाने की व्यवस्था है। इसके बाद ये प्रशिक्षक अपने जिलों में चयनित पुलिस पदाधिकारियों और जवानों को दंगा नियंत्रण की तकनीकों और ऑपरेशनल प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण देंगे।

तीन महीने में फिर होगी ट्रेनिंग

जवानों को सिर्फ शुरुआती प्रशिक्षण देकर छोड़ने के बजाय उनकी तैयारी लगातार बनाए रखने की योजना है। इसके तहत प्रत्येक तीन महीने में हर प्लाटून के लिए एक सप्ताह का रिफ्रेशर कोर्स कराया जाएगा।

यह प्रशिक्षण रोटेशन के आधार पर पुलिस केंद्र में आयोजित होगा। इसकी निगरानी पुलिस उपाधीक्षक (रक्षित) के स्तर से की जाएगी। रिफ्रेशर ट्रेनिंग में जवानों को भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा उपकरणों के इस्तेमाल, संचार व्यवस्था और आपात स्थिति में टीम समन्वय जैसी प्रक्रियाओं का नियमित अभ्यास कराया जाएगा।

अधिकारियों की भी तय होगी जिम्मेदारी

DARF की कार्यप्रणाली में जिम्मेदारियां भी स्पष्ट की गई हैं। दस्ता प्रभारी अपने अधीन बल की तैनाती, अनुशासन, संचार, सुरक्षा उपकरणों और कार्रवाई से संबंधित रिकॉर्ड के लिए जिम्मेदार होंगे।

पुलिस उपाधीक्षक (रक्षित) दस्ते के संचालन और व्यवस्थाओं की निगरानी करेंगे। वहीं पुलिस अधीक्षक और वरीय पुलिस अधीक्षक के स्तर पर प्रशिक्षण, संसाधन, उपकरण और जवानों के आवासन जैसी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी।

क्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षक और पुलिस उपमहानिरीक्षक अपने-अपने क्षेत्र में DARF से संबंधित कार्यों की निगरानी करेंगे।

स्थानीय पुलिस को मिलेगा त्वरित बैकअप

बिहार में बड़े जुलूस, राजनीतिक प्रदर्शन, धार्मिक आयोजन या अचानक बिगड़ने वाली कानून-व्यवस्था की स्थिति में स्थानीय पुलिस पर अतिरिक्त दबाव बनता है। ऐसी परिस्थितियों में पहले से प्रशिक्षित और संसाधनों से लैस विशेष बल उपलब्ध रहने से स्थानीय पुलिस को तत्काल बैकअप मिल सकेगा।

DARF की व्यवस्था का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि किसी तनावपूर्ण स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि प्रशिक्षित बल जल्द मौके पर पहुंचता है तो स्थिति को बड़े स्तर पर फैलने से पहले नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, इस व्यवस्था की वास्तविक प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दस्तों को नियमित प्रशिक्षण, पर्याप्त संसाधन और स्पष्ट कमांड सिस्टम कितना प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराया जाता है। 20 मिनट में रवाना होने का लक्ष्य तभी जमीन पर कारगर होगा, जब नियंत्रण कक्ष से लेकर वाहनों, संचार उपकरणों और जवानों की उपलब्धता तक पूरी व्यवस्था लगातार सक्रिय रखी जाए।

बिहार पुलिस की यह नई व्यवस्था कानून-व्यवस्था से जुड़ी आकस्मिक परिस्थितियों में जिला स्तर पर त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

कानून-व्यवस्था में त्वरित प्रतिक्रिया क्यों जरूरी?

दंगा या हिंसक प्रदर्शन की स्थिति में पुलिस की शुरुआती प्रतिक्रिया जितनी तेज और संगठित होती है, उतनी ही संभावना रहती है कि स्थिति को व्यापक रूप लेने से रोका जा सके। DARF का मॉडल इसी त्वरित प्रतिक्रिया पर आधारित है।

स्थानीय पुलिस के साथ विशेष रूप से प्रशिक्षित दस्ते की मौजूदगी से भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा घेरा बनाने, संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा और घटनास्थल पर अतिरिक्त बल उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। नियमित रिफ्रेशर प्रशिक्षण इस व्यवस्था को केवल कागजी ढांचे तक सीमित रखने के बजाय लगातार ऑपरेशनल रूप से तैयार रखने में अहम भूमिका निभाएगा।

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